सच को फुसलाता हूं रोज's image
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कहीं खो सा गया हूं 

यों तो दिखता हूं सबके साथ 

लेकिन कहीं गुम हो गया हूं !!

बात करता हूं जोर जोर से 

पर मन में कुछ रहता है दबा 

शायद कुछ खुद से छिपा रहा हूं !!


सच को फुसलाता हूं रोज 

झूठ को सच का चेहरा देकर 

पता नही क्या हासिल करने में लगा हूं !!


खूब हस्ता हूं खिल खिला कर 

जब हार जाता हूं सबसे से 

पता नही क्या जीतने में लगा हूं !!


वक्त का कुछ नही है पता 

जिंदगी की रफ्तार तेज हो चली 

लगता है मौत के नजदीक आ रहा हूं !!


उम्र बढ़ रही है या दिन कम हो रहे हैं

पर हां जिंदगी मौत को हर पल दस्तक दे रही है !!

शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"









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