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इंसान मतलबी है

Shatrunjai GiriShatrunjai Giri March 22, 2022
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नागवार रिश्तों में, चाह जो दबी है
बेगरज़ है रूह, जिस्म-ओ-जान मतलबी है

ख़ामोश लब हैं, पर चीख़ता ज़ेहन
बेज़ुबां हैं हसरतें, ज़ुबान मतलबी है

धुंधली पड़ी उम्मीदों से, बहला हुआ है दिल
बे-सुकूं जज़्बात की, मुस्कान मतलबी है

बेदिली से कर रहा है, ज़िन्दगी का रक्स
इंसानियत की आड़ में, इंसान मतलबी है

~ शत्रुन्जय

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