नारी सारा संसार है's image
Poetry1 min read

नारी सारा संसार है

Shashank ManiShashank Mani September 29, 2021
Share0 Bookmarks 9 Reads0 Likes


नारी! सुनो परदा हया व ड्योढ़ी का न गिराओ

तन को चमकाने में पानी, कुल, धरा, परिवार का न बहाओ।।

तुमसे है संसार वैभव, स्वर्ग, जीवन और नरक

पड़कर फैशन में वसन, निज रूप व माँग का मत हटाओ।।

 

तेरे नजरों में सुशोभित, प्रीत का उपवन ललित

ज्यों प्रवाहित हो रहा, सागर में सरिता का सलिल।।

ज्यों सितारे मिलके सारे, नभ, गगन, अम्बर सजाएँ

शील, ममता, नेह,उन्नति, हर घड़ी प्रति-पल बसाओ ।।

 

उर के अपने-पन से कलियों के सुकोमल दल हँसा दो

अधरों की मुस्कान से, नीरज, जलज, पंकज खिला दो ।।

अपनी तरुणाई से तरु में, कर दो तुम यौवन प्रफुल्लित

कटि-लचक की काम-लय से, सुमन-सरसों को झुकाओ।।

 

नारी! तुम में तीनों लोकों की यति और लय प्रवाहित

गिरि सी ऊँची दृढ़ता व सागर की गहराई समाहित।।

सहनशक्ति व कयामत का सघन-वन, हो बवंडर

अपने कलश-निधि से मनोरम, ‘सनम’ तुम अमृत पिलाओ।।

 

 

- - - विचार एवं शब्द-सृजन - - -

- - - - - - By - - - - - -

- - - Shashank मणि Yadava ‘सनम’ - - -

- - - स्वलिखित एवं मौलिक रचना - - -

 

 


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts