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ख्वाव लिए बैठा हूं

vikash sharmavikash sharma May 1, 2022
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आंखों में कुछ रंगीन ख्वाव लिए बैठा हूं
फिर वही ग़ज़ल की किताब लिए बैठा हूं

किसी ने छोड़ा तो किसी ने बिठाया पलकों पर 
उंगलियों पर मोहब्बत का हिसाब लिए बैठा हूं 

गर है तो उसे होने दो रुआब अपनी आंखों पर
मैं भी तो अपनी बातों में शराब लिए बैठा हूं

कुछ लोग हर बात का जवाब लिए बैठे हैं
मैं हूं कि हर बात पर सवाल लिए बैठा हूं 

विकाश शर्मा 

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