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 बूंदाबांदी तो हुई बरसात नहीं हुई 
 मुखातिब हुए उनसे पर बात नहीं हुई

अंधेरों की आरजू थी की जमाएंगे महफिलें
गनीमत है कि शहर में आज रात नहीं हुई 

जलती रही हस्ती मेरी वक्त के अंगारों पर
चमकी है बहुत खूब लेकिन राख नहीं हुई

विकाश शर्मा 

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