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विशाल गगन मेरे लोचन,श्याम घन आंसू है।

दिवस प्रकाश मेरा हास्य,रात्रि तम रूदन है।।


द्रुम पल्लव सम कोमलता,

पाषाण हृदय की निष्ठुरता |

कराल काल सम निर्मोही,

शिशु हास्य सी मोहकता ||

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