ख़त..'s image
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सोच रही हूँ कि आज खुद को एक ख़त लिखू ,पर मेरा कोई पता नहीं है कहाँ लिखू......

चलो एक काम करते हैं, बहुत उलझाया है ज़िन्दगी ने हमे आज हम इसे परेशान करते हैं,

लिख के खुद को एक ख़त तेरे पते पर भेज दूँगी, तुम रखना उसे सम्भाल के,मिलेंगे जब हम उसी खण्डहर पे तो साथ पढ़ेंगे।

मैं देख के उस ख़त को खुशी से चौंक जाऊँगी, तुम पकड़ के मेरा हाथ साथ बिठा लेना।

फिर खोल के उसे मेरे दिल के राज़ जान लेंगे....

मैं वो सब लिखूंगी उसमे जो जो ख़ुद से भी हमेशा छुपा के रखा है, बन के अनजान फिर ख़ुद को जान लेंगे, तुम कहना मुझे...

तुम कहना मुझे के चल इस खत की ख्वाहिशों को पूरा करते हैं और मैं हां कह के तेरे साथ चल दूँगी।

इस तरह फिर खुद से मिल लुंगी।

 बहुत दिन से सोच रही हूँ कि ख़ुद को एक ख़त लिखूँ......

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