जो वीरगति को आतुर हो !'s image
MotivationalPoetry1 min read

जो वीरगति को आतुर हो !

ShahadatShahadat September 10, 2021
Share0 Bookmarks 30 Reads0 Likes
शोक सदा तुम अपना पाले
गवाँ जीवन के देते क्षण,
दिन रात की वेदनाओं से
बना स्वयं के भीतर देते रण॥

अंगारो पर चलना पर 
न थकान करो सहज स्वीकार
कठिन डगर -पथ के कंटक
से खाकर जख्म न मानो तुम अपनी हार॥

उठो निद्रा से पहनो बल को
लड़ो, की तुम बहादुर हो,
इतिहास उसी को सुहाता
जो वीरगति को आतुर हो॥

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts