गौरैया's image
Share0 Bookmarks 26 Reads1 Likes
अब नही आती आंगन में गौरैया, जिनके चहक से
पूरा घर खिल उठता था, वो घोंसला जिसे महीनो तक
एक एक तिनका जोड़ कर बनाती थी आज वही घोंसला वर्षो से खाली पड़ा है, मैं जब छोटी थी तो याद है मुझे, उनके बच्चे को चुरा लिया करते थे,
घर वालो से चुप चुप कर उनको दूध पिलाया करते थे, तब ज्यादा ज्ञान नही थी , पर जो भी था सही था
क्योंकि बचपना में ही सही मगर उनको कभी तकलीफ नहीं दिया, हमारी टोली में जो सबसे बड़ा था उसको कही से पता चला था कि बच्चे को छूने से बढ़ते नही है फिर हम  अलग अलग रंगो से उनको रंग दिया करते थे ताकि पता चले  किसकी चिड़िया कितनी बड़ी हुई है, हम दिन भर उनके पीछे पीछे भागा करते थे, ठंडी के दिनों में उनके लिए बिस्तर लगाया करते थे मगर वो रात भर उसके सामने बैठ कर अपने घर की तलाश करती थी, जब हमे लगा की गलत किए है फिर उस बात पर दुखी होते थे
ये बचपन की बात है जब हमारे आंगन में भी गौरैया आती थी ..... जब पता हमे लग जाता था किसी घोंसले में अंडा है फिर सारी टोली मिल कर उस घोंसले की रखवाली करते थे, ये सब बचपन की बात है जब हमारे आंगन में गौरैया आती थी.....।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts