दास्ताँ-ए-दिल's image
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जो निकले कभी तुम्हारे आँसू,
पोंछने को कई हाथ होते हैं,
किसे फ़िक्र है यहाँ हमारी,
हम तो रोते-रोते सोते हैं,
सोते-सोते रोते हैं ।

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