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जीयो "ज़िन्दगी"

Santosh kanoujiaSantosh kanoujia July 3, 2022
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मैं यहां भी गुजरती हूँ
मैं वहां भी गुजरती हूँ
फर्क बस इतना सा है,
अमीर मुझे ऐश मे गुजारता है
गरीब मुझे तैश मे गुजारता है..

क्या है ज़िन्दगी. ??
सुबह सुबह उठना,काम पर जाना
दिनभर की आपा धापी के बाद,
शाम होते होते तंग हो जाना..
क्या यही है ज़िन्दगी..?

शायद नही,जीना चाहो तो
आसमान की ऊंचाई तक है,समुद्र की गहराई तक है
खुशियों मे भी है ज़िन्दगी,आंसुओं मे भी है ज़िन्दगी

जीना चाहो तो,
घडी के कांटो के हिलने से लेकर,तुम्हारे पलक झपकने तक
हर पल है ज़िन्दगी..

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