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फैसला नसीब का

sanower0111sanower0111 September 21, 2022
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न मैं तेरी किस्मत हूं
न तू मेरा नसीब है
फिर किस हिम्मत के साथ तू
इस दुनिया के फ़ैसले ठुकराएगा

तू तो है दिल से मजबूर
मैं मजबूर हालातों से हूं
तू इतना नादान है कि 
मेरे हालत नहीं समझ पाएगा

तेरा बोझ तेरी मोहब्बत है
मुझ पर बोझ जिम्मेदारियों का है
मैं उतार दूं ये बोझ तो
मेरा किरदार कौन निभाएगा

तू एक परिवार का सहारा
किसी के घर की इज़्ज़त हूं मैं
अगर इज़्ज़त कलंकित हुई तो
किसी का सहारा भी टूट जाएगा 

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