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दरख़्त (वृक्ष)

SANGITA BISHTSANGITA BISHT February 2, 2022
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किया कुर्बान अपना सब कुछ आपने
दिया हर रंग हमें,  इन्द्रधनुष का , आपने
दिया हर पल हमें ,अपना ,आपने
ख़राब की, ना जाने कितनी नींदें, अपनी आपने
परवाह ना कि किसी पहर की आपने
भरी गर्मी में भी ,दी जो ठंडक ,आपने
सर्द मौसम में ,दी जो गर्माहट प्यार की, आपने
ना जाना, क़, ख़, ग पढ़ना ,फिर भी दी शिक्षा आपने
सिखाया , परिश्रम करना, आपने
सिखाया मेहनत की सीढ़ियों से मंज़िल पाना आपने
सिखाया ज़ज़्बा जीतने का आपने

देखते ही देखते 
तारुणाय से वृद्धत्व का सफर तय कर लिया आपने
ज़िन्दगी के ना जाने कितने, पड़ाव,पार कर लिए आपने
भूलेंगे नहीं कुछ भी ,हम 
क्योंकि वाक़िफ है इस सच से हम
कि वज़ह सिर्फ़ और सिर्फ हो आप 
अगर है किसी मुकाम में आज हम

रहना मार्गदर्शक हमेशा हमारी
कितना भी छू ले हम आसमां 
बस डोर आपसे बंधी रहे हमारी 

जन्मदिन पर आपको दिल से देते है दुआ
दे ख़ुदा लंबी उम्र आपको
रखे सदा हष्ट पुष्ट आपको 
खुशियों से आबाद रखे आपको
बस दे सकते है ये एहसास और दुआ दिल से 
क्योंकि
बिसात नहीं हमारी 
कि चुका सके मोल आपकी कुर्बानी का हम
कि चुका सके कर्ज़ आपकी मेहनत का हम
कि चुका सके ऋण आपकी नींदों का हम
कि चुका सके उधार आपकी हर घड़ी का हम

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