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एक कविता तुम्हारे लिए  - "अच्छे लगते थे तुम"

Salma MalikSalma Malik January 26, 2023
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अच्छे लगते थे तुम जब वो सड़को की सैर पर निकलते थे,
वो सादी चप्पलें पहने हुए,
अच्छे लगते थे जब यूँ ही पूरी मौज में चला करते थे,
अच्छे लगते थे तुम जब तुम अपने अंदर अपना गाँव बसाकर चलते थे,(शहर में होते हुए भी)
अच्छे लगते थे तुम जब कहते थे कि मुझें ये अंग्रेज़ी वंग्रेजी अच्छे से नहीं आती,इसलिए हिन्दी लिखता हूँ,
अच्छे लगते थे तुम जब वो छोटी छोटी बातें लिखने में बड़ा वक़्त लिया करते थे,
अच्छे लगते थे तुम जब यूँ ही हमें कह दिया करते थे कि तुमसा कोई नहीं,
अच्छे लगते थे जब तुम वो काला कोट पहना करते थे,
अच्छे लगते थे तुम तुम्हारे हर अंदाज़ में,
बोलने में,
चलने में,
रूठने में,
मनाने में,
तुम्हारे प्रेम में होने में,
तुम्हारे प्रेम करने में,हाँ मगर तुम्हारे गुस्से से डर लगता था।
और आज भी अच्छे लगते हो तुम,जब मैं तुम्हें ख़बर हुए बिना तुम्हें देख लेती हूँ,
अच्छे लगते हो आज भी जब तुम यूँ ही स्कूल के बच्चो के साथ बैठकर बातें करते हो,
उनके साथ खेलते हो,
उन्हें मोटिवेट करते हो,
उन्हें जिंदगी को जीना सिखाते हो,
अच्छे लगते हो जब बच्चो के साथ बच्चे बन जाते हो,
अच्छे लगते हो जब आज भी वो बचपन के दोस्तों से पूरी दोस्ती निभाते हो,
अच्छे लगते हो,जब शहरों में घूमने जाते हो,
ज़िम्मेदारियों का बैग नहीं,सुकून के पल लेकर चलते हो,
अच्छे लगते हो तुम जब माँ और बाऊजी के अच्छे बेटे बनकर उनका ख़्याल रखते हो,
अच्छे लगते हो तुम जब अच्छे भाई बनकर आज भी दीदी को घर लाते हो,
अच्छे लगते हो जब तुम कविताएँ लिखते हो,
अच्छे लगते हो जब कविताएँ पढ़ते हो,
(हाँ मगर आज भी उन्हें अच्छे से pronounce नहीं कर पाते)
तुम अच्छे ही लगते रहोगे,जब तक मेरी कवितायों में तुम्हारा वजूद है,
चाहे मैं कितनी भी कोशिश कर लूँ तुम्हें अच्छा न मानने की,मगर मेरी कविताएँ मुझें तुम्हारे अच्छे होने का एहसास दिलाती रहेगी,और फिर कही ना कही तुम्हारे दिए हुए ज़ख़्मो का भी।

- Salma Malik 
26 January 2023

 

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