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लाख ताने हमें सुनाए गए

हम मगर दोस्ती निभाए गए


सच के तन पे निशान चाबुक के

झूठ कांधे पे सब बिठाए गए


जिनके हाथों ने धान काटे थे

भूख से वो सभी जलाए गए


हम पे इल्ज़ाम फिर कोई रख दो

दिन हुए, हम नहीं सताए गए


हम ने सूरज भी घूर के देखा

वो अंधेरे में मुँह छिपाए गए


- साहिल

Twitter: @Saahil_77

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