ऊंचाई's image
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हम तो धरती से आकाश की

ऊंचाई नापना चाहते हैं

अपनी हसरतों से असीमित

गगन छूना चाहते हैं,

हम परिंदा हैं जो रोज उड़ान भरकर

आकाश की दूरी को भी नाप लेते हैं

मगर आसमान पर ठहर नहीं सकते

धरती से जुड़े हैं इसलिए धरती पर

आना ही है यही तो हमारा ठिकाना है ।

हसरतों की उड़ान कितनी भी ऊंचाई

नाप ले धरती पर आना ही पड़ता है

इस पावन मिट्टी में एक दिन मिल

जाना ही पड़ता है ।।

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