सीमा रेखा's image
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चांद कितना भी गगन में चमके

रात को दिन तो नहीं बना सकता

सूरज बनना भी चाहे तो

धरती को ऊर्जा तो नहीं दे सकता,

कुदरत ने हर निर्माण की नियति

निर्धारित की है,

अपनी सीमा को जो तोड़ना चाहेगा

तो कयामत होगी ।

अपने औकात को समझना होगा

वो इंसान हो या प्रकृति अपने सीमा में

रहना होगा ।।

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