खो गई पहचान's image
Share0 Bookmarks 63 Reads0 Likes

खो गई पहचान अजनबी हो गया

दुनिया के भीड़ में मैं अकेला रह गया

भूल गए सब जो कभी अपने होते थे

अब तो बुझा दीपक बन कर रह गया ।

शिकवा नहीं किसी से ना शिकायत

किसी से है

वक्त की नजाकत है और कुछ नहीं है

सपनों के खंडहर में अकेला खड़ा हूं मैं

उम्मीद की रोशनी में बिखर के रह गया ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts