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Kavishala DailyPoetry1 min read

कभी अंबर शोक मनाता है

Sahdeo SinghSahdeo Singh September 5, 2022
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कभी अंबर शोक मनाता है

अनगिनत तारों को आंचल में समेटे

हर सुख दुख से लिपटे सिमटे

कभी नहीं घबराता है

कभी अंबर शोक मनाता है ।

जब तारे टूट कर गिरते हैं

सदा के लिए बिछड़ते हैं

कभी आंसू नहीं बहाता है

विशाल काय सत्ता का स्वामी

जहां सूरज चंदा इसके अनुगामी

ना कोई अहंकार ना कोई घमंड

बस अपना स्नेह दिखलाता है

कभी अंबर शोक मनाता है ।।

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