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जीने की आरजू में

बिखरते चले गए

अपने ही आप में उलझते चले गए

कभी जिंदगी के हर पल खुशगवार थे

अब तो कांटों के शाख मे उलझते चले गए,

कुछ हसरतें बेतकल्लुफ हुई

कुछ हम बिंदास थे,

आज उन बीते लम्हों में सिमटते चले गए ।।

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