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Kavishala DailyPoetry1 min read

जाएं तो जाएं कहां

Sahdeo SinghSahdeo Singh December 14, 2021
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जाएं तो जाएं कहां,

मंजिल का ठिकाना नहीं,

भटक रहे यहां और वहां ।

जाएं तो जाएं कहां ।

जीवन का कोई ज्ञान नहीं,

इंसान रूप है पर इंसान नहीं,

लालच मोह के माया में सब,

उलझे हैं यहां ।

जाएं तो जाएं कहां ।

ईश्वर ने मानव रूप दिया,

हमने ना वो काम किया,

जाति धर्म के नफरत में उलझे,

जीवन को बदनाम किया,

इस दुनिया में माया में उलझे,

छोड़ चले ये जहां,

जाएं तो जाएं कहां ।।

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