गुलामी's image
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कभी कभी हसरतें इंसान

को गुलाम बना देती है

दौलत और शोहरत की चाहत

में इंसान को हैवान बना देती हैं

जुल्म करना और जुल्म सहना

दोनो गुलामी ही है

इन्हीं मंसूबे में उलझे इंसान को

अंधा बना देती है ।

अपने रसूख की हवस हो या शोहरत

की बुलंदी

हर जुनून इंसानियत के लिए

शर्मिंदगी

इसमें फंसने वाला ही ईश्वर की सत्ता

को चुनौती

एक गज कफन ही इंसान की पूंजी

फिर गुलामी दौलत की छोड़ मानवता

की करो बंदगी ।।

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