एक अजनबी's image
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एक अजनबी से मिला वो था कमाल का,

आंखों में बड़े सपने थे मदमस्त चाल था,

बातें बड़ी बड़ी करता बेफिक्र था बंदा,

बेरोजगार था ना था कोई धंधा,

फिर भी बड़े जोश विश्वास से कहता,

मेरे तो श्री राम हैं वही हैं कर्ता,

आस्था इंसान के जीने का है संबल,

रोटी के लिए तो कर्म एकमात्र है संबल,

ईश्वर की भक्ति करो छोड़ दो मोह माया,

उससे ही तुम्हारे सारे सपने पूरे होंगे भाया,

मैं सोच में पड़ गया यह कैसी बयार है,

काम धाम छोड़ खुद ईश्वर पर भार है ।।

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