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आसमान को छूना है

Sahdeo SinghSahdeo Singh October 10, 2022
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आसमान को छूने की तमन्ना में

मैं उड़ता चला गया

खो गया असीमित अंबर में

मंजिल भटक गया

तमन्नाओं के बवंडर में ऊपर उड़ता रहा

जब ठहर न सका इस बुलंदी पर

जब गिरा धरा पर होश उड़ गया ।

पंख घायल हो गए अहंकार के अतिरेक से

आकाश नापने में जमीं पर आ गया ।।

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