अंधेरा के आगे's image
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बहुत अंधेरा घिर आया है,

कब सूरज की रोशनी फैलेगी,

कब फिजा में तैरती काली छाया,

रोशनी की जगमगाहट से छंटेगी,

सबके आंखों पर एक काली पट्टी

बिछ गई है जिसमें मानवता आहत

होकर अपने ही किस्मत पर रो रही है,

पट्टी को हटाओ निगाह उठाकर देखो,

नई सुबह की नई सोच से जिंदगी

में मानवता और सहिष्णुता का भाव भरो,

जागो जागो मेरे भाई ।।



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