आजादी का सच's image
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यह कैसी आजादी ?

कल मैं सोचने लगा,

यह कैसी आजादी है,

चौहात्तर साल बाद भी,

आम जनता जिन्दगी

जीने के लिये संघर्ष,

कर रही है,

भूख, गरीबी, बेरोजगारी,

आर्थिक तंगी के जंजीरों,

जकड़ी अपने अस्तित्व के,

लिये रोज लड रही है,

यह कैसी आजादी ?

जहाँ गरीब गरीब होता जा रहा,

अमीर अमीर हो रहा है,

अस्सी करोड से अधिक लोगों,

को सरकारी मुफ्त राशन पर,

गुजर करना पड रहा है,

यह कैसी आजादी ?

आम इंसान तमाम बिसन्गतीयों,

से जूझता दो वक्त की रोटी,

जुटाने के लिये संघर्ष कर रहा,

सुकून का एक पल भी मयस्सर नहीं,

क्या हम इसी आजादी की,

कल्पना किये थे ?

शायद नहीं !!!

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