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अंधेरी रात है अभी
कुछ ख्वाब अधूरे बाकी हैं,
अनकहे सवालों के
ढूंढने जवाब अभी बाकी हैं
अभी निकला ही हूं मैं
रेत की पगडंडियों पर
छोड़ने रेत पर मेरे पैरों
के निशां अभी बाकी हैं
अभी फूटा ही है नव अंकुर
कोई वसुधा पर
बन के दरखत भी देनी
छांव अभी बाकी है
चला हूं अपनी ही जिंदगी की
कहानी लिखने
अंपने किरदार से करनी मुझे
मुलाकात अभी बाकी है
ये तो आगाज़ है
जीवन के नए रास्तों का
जहां को देखनी मेरी
परवाज़ अभी बाकी है..

रुचि गोस्वामी

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