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ज़िंदगी के नखरे

Roopali TrehanRoopali Trehan February 28, 2022
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ज़िंदगी तेरे भी नखरे हज़ार हैं

मुस्कुराहटें हुई जाती बेज़ार हैं


टूटते हरपल दिल के यहाँ तार हैं

बेचैनियों के साए

हरदम सर पर सवार हैं


उदासियों के मसले

हर लम्हें में शुमार हैं

दर्द का बोझ अब

हुआ जाता नागवार है


ज़िंदगी तेरे भी नखरे हज़ार हैं

ख़्वाबों का रास्ता रोकती

हकीकतें शर्मसार हैं

हकीकतें शर्मसार हैं

✍️✍️

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