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उम्मीदों का सूरज

Roopali TrehanRoopali Trehan August 29, 2021
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खोजता फिरा बाहर जिसे

वो अंदर तेरे रहा छुपा

नादानियों के तहत अपनी

तू कभी ना उसे ढूंढ सका


उम्र बीती ज्यों ज्यों

इच्छाओं का लोभ बढ़ता गया

सुकून पाने की आस में

उलझनों के दलदल में

तू हरपल धसता गया


वक्त अपनी चाल से

बेधड़क चलता गया

ज़िंदगी जीने की

जद्दोजहद में

उम्मीदों का सूरज

हर रोज़ ढलता गया

✍️✍️

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