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तसल्ली कहाँ होती है

Roopali TrehanRoopali Trehan December 23, 2021
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तसल्ली कहाँ होती है दिल को

जब तक मुकम्मल ना हो

ये तम्मनायें ही तो हैं

जो बेज़ार ज़िंदगी में

जीने की चाह बढ़ाती हैं


क़रार कहाँ होता है दिल को

जब तक मुसलसल ना हो

ये शिद्दत ए एहसास ही तो हैं

जो दूरियों में भी हरपल

बेकरारियों को बढ़ाता हैं


चाहतें कहाँ समझ आती हैं

जब तक मयस्सर ना हो

ये तलब ही तो है जो

विसाल ए यार की चाह को

हरदम और हरपल बढ़ाती है

✍️✍️

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