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रिश्तों का दलदल

Roopali TrehanRoopali Trehan August 23, 2021
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रिश्तों का दलदल है ये

ज़रा संभल कर रखिएगा क़दम

फस गए जो इक मर्तबा

तो निकल जाएगा दम


अपनों की हमदर्दी देख

पालिएगा ना कोई भ्रम

पीठ पीछे साजिशों से

यहां ढाते हैं सितम


व्यर्थ के दिलासों

का रखिएगा ना वहम

अंतर्मन की सच्चाई देख

रह जाएंगे सहम

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