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लाहासिल हसरतें

Roopali TrehanRoopali Trehan September 15, 2022
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लाहासिल हसरतों का

बोझ उठाए है

दिल है की हरपल

अपनी टांग अड़ाए है


सुने है न किसी की

न किसी को बताए है

राज़ जाने कितने

इसने भीतर समाएं है


लबों पर इसने अपने

ताले लगाए हैं

पूछे जो कोई तो

सिर्फ़ भारीपन बताए है


दिल की भी अपनी

अलग ही अदाएं हैं

हकीकत को ढक परदे में

बहुत कुछ छुपाए है


लाहासिल हसरतों

का बोझ उठाए है

दिल है की हरपल

अपनी टांग अड़ाए है

✍️✍️

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