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कुछ समझौतों के फेर में

Roopali TrehanRoopali Trehan November 24, 2021
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बस एक लम्हे के झगड़े में

कितने जज़्बात नज़रअंदाज़ हुए

कुछ हकीकतों के फेर में

कितने सपने उम्रदराज़ हुए


कुछ लफ़्ज़ों के फेर में

कितने सारे फ़साद हुए

कुछ गलतफहमियों के झांसे में

कितने मौसम बर्बाद हुए


कुछ उम्मीदों के साए में

कितने एहसास नाशाद हुए

कुछ समझौतों के फेर में

दिल पर कितने आघात हुए

✍️✍️


नाशाद (दुखी/नाखुश)

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