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ख़त्म होने को बेकरार है

Roopali TrehanRoopali Trehan October 8, 2021
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ख़त्म होने को बेकरार है

ना जाने कैसे ये 

ज़िंदगी की रफ़्तार है


किसी को फ़र्क़ नहीं

तो किसी को इंतज़ार है

ना जाने कैसे ये 

रिश्तों की पुकार है


किसी को नागवार

तो किसी को स्वीकार है

ना जाने कैसे ये

जज़्बातों का खुमार है

✍️✍️

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