काफ़िले यारों के's image
Poetry1 min read

काफ़िले यारों के

Roopali TrehanRoopali Trehan October 30, 2021
Share0 Bookmarks 4 Reads0 Likes

धीरे धीरे सब बदलते चले गए

काफ़िले यारों के बिछड़ते चले गए


ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबते चले गए

मनमानियों की राहों से हटते चले गए


समझदारियों के फेर में उलझते चले गए

नादानियों के घेर से निकलते चले गए


दिल की बातों से मुकरते चले गए

दिमाग़ के दलदल में उतरते चले गए


धीरे धीरे सब बदलते चले गए

काफ़िले यारों के बिछड़ते चले गए

✍️✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts