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दिल कबसे तलबगार है

Roopali TrehanRoopali Trehan January 3, 2022
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खुशियों की दस्तक का ये

दिल कबसे तलबगार है

दर्द की चौखट पर मुस्कुराहटें

हरपल करती गुहार हैं


उलझनों में फंसी ज़िंदगी ,

हुई जाती बेज़ार है

चैन ओ सुकून पाने की खातिर

दिल फिरता बेकरार है


बेचैनियाँ हैं तमाम और

कश्मकश सिर पर सवार है

रंजीदा हो चली सांसें और

जज़्बातों का आया भूचाल है


दिखता ना कोई हल ना ही

मिलता कोई उपचार है

संजीदा हो चली हकीकतों को

अभी भी ख्वाबों के मुक़म्मल

होने पर ऐतबार है

✍️✍️

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