बगावत's image
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हर वक्त चुप होना भी मुमकिन नहीं 

कभी कभी तो जज़्बात भी 

बगावत पर उतर आते हैं

एहसासों को ज़ब्त करते करते

भावनाओं के श्वास ही निकल जाते हैं


हर वक्त सहना भी मुमकिन नहीं

कभी कभी तो तर्क भी 

बगावत पर उतर आते हैं

इच्छाओं को ज़ब्त करते करते

रिश्तों के धागे उलझ जाते हैं


हर वक्त दिखावा भी मुमकिन नहीं

कभी कभी तो वास्तविकता भी

बगावत पर उतर आती है

सच्चाई पर पर्दा करते करते 

बनावट भी ऊब जाती है

✍️✍️

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