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आँखों की अलमारी

Roopali TrehanRoopali Trehan August 24, 2022
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इक पुराना ख़्वाब मिला

आँखों की अलमारी में

छूट गया था पीछे जो

बढ़ती ज़िम्मेदारी में


हाथ बढ़ाया मैंने

उसको जो उठाने को

कतराया वो थोड़ा मुझको

फिर से अपनाने को


उलझी मैं खिसयाई

जिद्दायी गले लगाने को

पीछे सरका वो

मुझको ठुकराने को


कुछ देर के बाद

बात समझ में आई

हक़ीक़तों की ताना तानी में

ख़्वाबों की कली कुम्हलाई

ख़्वाबों की कली कुम्हलाई

✍️✍️

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