जानिए समझिए's image
Poetry1 min read

जानिए समझिए

AbhishekAbhishek February 1, 2022
Share0 Bookmarks 17 Reads0 Likes

घंटो तक कहीं जो रुकी रहे, 

उसे रेल नहीं कहते


बच्चे आपस में न उलझें तो, 

उसे खेल नहीं कहते


भारी छूट ना मिले अगर,

उसे सेल नहीं कहते


कोशिशें जारी रखे इंसां तो, 

उसे फेल नहीं कहते


सभी सुविधाएं मिले जहाँ, 

उसे जेल नहीं कहते


चुनाव आते ही छूटे साथ तो, 

उसे तालमेल नहीं कहते


       - अभिषेक


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts