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घायल विचार

AbhishekAbhishek August 29, 2021
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हालातों की ठोकरें खा कर

घायल हो जाता है

जब कोई विचार

और तड़पता रहता है

ज़ेहन के व्यस्त रस्ते पर

तो इससे पहले कि, 

तोड़ न दे दम कहीं ! 

उसे कलम के ऐम्बुलेंस से

भावनाओं के अस्पताल ले जाकर

काग़ज़ों के बिस्तर पे

सुला देता हूँ

और हौले हौले से

लफ़्ज़ों की चादर

ओढ़ा देता हूँ


 - अभिषेक

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