बाल-मज़दूर's image
Poetry1 min read

बाल-मज़दूर

AbhishekAbhishek May 1, 2022
Share0 Bookmarks 6 Reads0 Likes

माँ-बाप इनके मजबूर

शिक्षा से ये कोसों-दूर

किताबों से, 

नहीं कोई नाता I

बस, रोटी कमाने का

हुनर है आता I

क्या ग़रीबी का है यही दस्तूर ? 

या व्यवस्थाओं का है सारा क़ुसूर I

कई बच्चे, देश का भविष्य नहीं ! 

बनते हैं सिर्फ़ "बाल मज़दूर" !


        - अभिषेक

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts