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अमीर-ग़रीब

AbhishekAbhishek May 1, 2022
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अमीर देता है ग़रीबों को तोहफ़े की तरह गाली

ग़रीब करता है फिर भी उसके आशियाने की रखवाली


अमीर कर लेता है मनचाही फ़ज़ा आस-पास

ग़रीब करता है पसीने से शीतलता का आभास


अमीर तन को गरमाता है उष्ण मख़मली पोशाक से

ग़रीब ठंड को भगाता है सिकुड़ते जिस्म के लिहाफ़ से


अमीर ख़रीद लेता है पैसों से ऐश-ओ-आराम

ग़रीब कर नहीं पाता है कफ़न का भी इंतिज़ाम


अमीर का हर दिन है इक नया त्योहार

ग़रीब का हर रोज़ संघर्ष और फटकार


             - अभिषेक


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