मज़ा है।'s image
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धूप में जलने का भी अपना एक मज़ा है,

अपने आप से उलझने का भी एक मज़ा है।




हर पल ठोकरें खाती हुई इस ज़िंदगी में,

गिर कर ख़ुद ही संभलने का भी एक मज़ा है।




नए-नए चेहरों से भरी हुई राहें छोड़ कर,

अंजान सड़क पे तन्हां चलने का भी एक मज़ा है।




-रवि नकुम (ख़ामोशी)

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