मज़ा है।'s image
Share0 Bookmarks 62 Reads0 Likes

धूप में जलने का भी अपना एक मज़ा है,

अपने आप से उलझने का भी एक मज़ा है।




हर पल ठोकरें खाती हुई इस ज़िंदगी में,

गिर कर ख़ुद ही संभलने का भी एक मज़ा है।




नए-नए चेहरों से भरी हुई राहें छोड़ कर,

अंजान सड़क पे तन्हां चलने का भी एक मज़ा है।




-रवि नकुम (ख़ामोशी)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts