एहसास -ए -मोहब्बत (रवि कान्त कुड़ेरिया)'s image
Love PoetryPoetry1 min read

एहसास -ए -मोहब्बत (रवि कान्त कुड़ेरिया)

Ravi kant KuderiyaRavi kant Kuderiya October 30, 2021
Share0 Bookmarks 37 Reads2 Likes
जा चुकी हो मीलों दूर कहीं छोड़कर हमे  लेकिन आज भी तू इस दिल के पास है

थाम लिया है गैरों का गैरों का हाथ तुमने, लेकिन इन वाहों को आज भी तेरा एहसास है।


वक़्त-वेवक्त न जाने क्यों बैठा रहता हूँ उन जगहों पर जहां हम दोनों शामें गुजार दिया करते थे

जी रही है तू अपनी ज़िंदगी हमें भुलाकर कहीं और , लेकिन तेरी हर यादें आज भी मेरे साथ है।।

      ~ रवि कान्त कुड़ेरिया ~

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts