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लहरें ये झूठ की

Rashid Ali GhazipuriRashid Ali Ghazipuri November 17, 2022
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लहरें ये झूठ की

हर बार ही कोशिश करती

सच के किनारों पे ही जा गिरती,

साजिश हर बात पे और साँसों में भी लिपटी

है थोड़ी सी सहमी पर खुद को ‘सच’ ही कहती,

स्याह और काली सी

हर दिल में अब जो बसती

दिन के उजाले में हर सीमट अँधेरा करती,

सब सच मिटाने की

नाकाम ये कोशिश करती,

लहरें ये झूठ की हर बार ही कोशिश करती

दिल के अंधेरों में हर बार ही घर करती…

‘Rashid Ali Ghazipuri ’



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