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इक उम्र गुजरी हैं, तेरी राह तकते,

सब्र अब नम हो गया है ,

रोशन था जो दीपक तेरे इंतजार में, अब ये मंद हो गया है !

तेरी आने की आस थी तो, उजाला था इसका पूरे महल में,

चर्चे सुने से जब से तेरे न आने के, तब से हर ओर अंधेरा हो गया है !!

~RSC

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