पहला ख़त's image
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पूछो मत मुझसे कौन हूँ मैं
कुछ कुछ कहने को व्याकुल
नीले अंबर का मौन हूँ मैं
मेरे दिल के कागज़ का
भेज रहा हूँ टुकड़ा तुमको
पढ़ने से पहले हँस देना
सावन, बादल, घोर घटाएँ
सुनने को सब घुमड़ आएंगे
खोलते ही इस कागज़ को
बस तुम अधरों से चूम लेना
जो कुछ पढ़ना चाहोगी
वो अक्षर आप उमड़ आएंगे।

— कुराज

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