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काॅल का इंतज़ार

KuraajKuraaj December 12, 2021
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आज रात भर जगकर एक सुनहरा ख्वाब देखा है
इन मसलती आँखों से पहली बार ढलता महताब देखा है
आज हवाओं मे नई महक आई है
सूरज ने सालों बाद लाली दिखाई है
आज उबासियों की जगह अंगड़ाईयों का मन है
आज हर एक चेहरा खिलता चमन है
आज फोन हाथों से छूट नही रहा है
ख्यालों से ये क़सीदा टूट नही रहा है
आज आलस और देर तक सोना सब ना-ग़वार है
बस तेरी कॉल का इन्तज़ार है।

आज कोई सुनहरा गीत गाऊंँ मै
ज़बान बार बार ये कहती है
हवा कंघी कर रही मेरे बालों मे
धूप सिरहाने आ बैठी है
एक बेचैनी सी कब से दिल का दरवाज़ा खटखटा रही है
आज हवाओं की ये महक मेरे बदन को कंपकपा रही है
आज कुदरत की पलकें मुझपे झुकी हुई हैं
आज घड़ी की सुईयाँ यंही रुकी हुई हैं
आज ये दिल भी आसमानों पे सवार है
बस तेरी कॉल का इन्तज़ार है।

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