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उजाला


अंधेरे में वो उजाले को तरस रही थी। दुनिया में आने के बाद छाया ने जाना, अपनी उजली सुन्दर माँ की काली कमाई के बारे में। छाया ने अपनी माँ से कहा ’’ चलो माँ, इस जगह से दुर चलो। ’’

’’ मगर कहाँ ? ’’

’’ कहीं भी इस अंधेरी-गंदी दुनिया से दुर, मोहन चाचा के घर ही चलो। ’’

सरला ने अपनी बेटी छाया की तरफ भावूक होकर गौर से देख कर कहा ’’ मोहन चाचा के घर ? ’’

परदे के किनारे छाया को ले जाकर कहा ’’ वो देखो तुम्हार मोहन चाचा, पैसे गिन रहा है और इस गंदी-अंधेरी जगह का मालिक भी वही है, मैं और तुम उसी के रिश्तेदारी की सजा भुगत रहे हैं। ’’

फिर कुछ ही समय के बाद माँ और बेटी को अलग-अलग कमरे में बंद कर दिया गया।

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