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Romantic PoetryPoetry1 min read

वो अंबर वो आंगन ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini August 20, 2022
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वो अंबर भी झांकू जिससे झरने सा बहता होगा वो,

वो आंगन भी देखूं जिसमें पवन सा रहता होगा वो।

 - राजीव ' हैरान '

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